Thursday, February 13, 2020

क्या अच्छी-अच्छी बातें करके जलवायु परिवर्तन रोका जा सकता है?

जलवायु परिवर्तन, सारी दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या बन चुका है. दुनिया भर में लोग इसे लेकर चिंतित हैं.

कुछ लोग अपने-अपने स्तर पर इसे बचाने के लिए प्रयास कर भी रहे हैं और उनकी कोशिशों की सराहना भी हो रही है.

और बाक़ी दुनिया ये उम्मीद लगाए बैठी है कि इन लोगों की कोशिशों से हमारा भविष्य सुरक्षित हो जाएगा.

लेकिन दूसरों की कोशिशों की तारीफ़ करने भर से काम चलने वाला नहीं है. हमें बेहतर भविष्य के लिए ना सिर्फ़ उम्मीद करनी है, बल्कि उसके लिए मिलकर कोशिश भी करनी होगी.

अभी तक धरती को बचाने के लिए महज़ बड़ी-बड़ी बातें हुई हैं. नीतियां बनाई गई हैं. लेकिन अमल नहीं हुआ है.

नतीजा ये रहा कि हालात बद से बदतर होते चले गए. शायद हम सभी के ज़हन में कहीं ना कहीं ये बात बैठी हुई है कि, जो चल रहा है बस वैसा ही चलता रहेगा. जब ठीक होना होगा, तो हो ही जाएगा.

दूसरे कोशिश कर ही रहे हैं. लिहाज़ा किसी ना किसी दिन उनकी कोशिशें कामयाब हो जाएंगे और सब ठीक हो जाएगा. ऐसी हमें उम्मीद है. सिर्फ़ उम्मीद.

हमारे मुक़ाबले, नई पीढ़ी इस धरती को बचाने के लिए ज़्यादा फ़िक्रमंद है. तभी तो स्कूल के बच्चे आज सड़कों पर उतर आए हैं.

कह रहे हैं कि साफ़ हवा-पानी हमारा हक़ है. हम से हमारा हक़ में छीनिए.

इसकी सबसे चर्चित मिसाल हम ग्रेटा थनबर्ग के रूप में देख सकते हैं.

जो धरती की आब-ओ-हवा को बिगड़ने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज़ उठा रही हैं.

थनबर्ग ने महज़ 9 साल की उम्र में इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया था. उस वक़्त थनबर्ग केवल तीसरी कक्षा में पढ़ रही थीं.

पर्यावरणविदों का मानना है कि अगर सही समय पर कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयास नहीं किए गए, तो पृथ्वी के सभी जीवों का अस्तित्व खतरे में आ जाएगा.

धरती को बचाने के लिए दुनिया भर में कई तरह के आंदोलन चल रहे हैं. लेकिन, ये आंदोलन बस चल ही रहे हैं.

थनबर्ग, 16 साल की बच्ची पर्यावरण के लिए इतनी फिक्रमंद है कि उसने ब्रसेल्स में कहा था कि 'हम दुनिया के नेताओं से भीख मांगने नहीं आए हैं. आपने हमें पहले भी नज़रअंदाज़ किया है और आगे भी करेंगे. अब हमारे पास वक्त नहीं. हम यहां आपको यह बताने आए हैं कि पर्यावरण खतरे में है.'

थनबर्ग असल में एक उम्मीद है, ऐसी उम्मीद जो जो अपना मक़सद हासिल करने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है.

अगर क़ुदरत को बचाए रखना है तो हम सभी को उसके लिए मेहनत भी करनी होगी.