Thursday, January 24, 2019

दारुल उलूम देवबंद ने अपने छात्रों से कहा, 26 जनवरी को बाहर निकलने से बचें: आज की पांच बड़ी ख़बरें

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित इस इस्लामिक शिक्षण संस्थान ने सर्कुलर जारी कर अपने सभी छात्रों को हॉस्टल परिसर में ही रहने की अपील की है और बहुत ज़रूरी होने पर ही बाहर जाने को कहा है.

बयान में कहा गया है कि 26 जनवरी के आस-पास सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए जाते हैं, जगह-जगह चेकिंग होती है. इससे डर का माहौल बन जाता है.

देवबंद मदरसे ने अपने छात्रों को नसीहत दी है कि अगर बहुत ज़रूरी हो तभी घर से बाहर निकलें. सफ़र के दौरान संयम बर्तें, किसी से कोई बहस न करें और काम ख़त्म होते ही फ़ौरन मदरसे वापिस आ जाएं.

बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि 2021 में जाति आधारित जनगणना कराई जाएगी, अगर भाजपा दोबारा सत्ता में आती है तो.

उन्होंने कहा कि जनगणना के बाद जिस जाति की जितनी आबादी होगी, उन्हें उतना आरक्षण दिया जाएगा.

सुशील कुमार मोदी बिहार की राजधानी पटना में आयोजित कर्पूरी ठाकुर के जयंती के मौक़े पर बोल रहे थे.

मोदी ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो सरकार मामले को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाएगी.

रेल मंत्री पीयूष गोयल को बुधवार को वित्त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

अंतिम बजट के नौ दिन पहले उन्हें यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली की तबीयत ख़राब होने के कारण पीयूष गोयल को यह प्रभार दिया गया है. जेटली न्यूयॉर्क के अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं.

माना जा रहा है कि इस बार अंतरिम बजट पीयूष गोयल ही पेश करेंगे.

एयर इंडिया के पूर्व अध्यक्ष पर सीबीआई ने किया मामला दर्ज
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एयर इंडिया के पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अरविंद जाधव के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

उन पर विभिन्न पदोन्नतियों और नियुक्तियों में कथित रूप से प्रक्रियाओं के उल्लंघन करने का आरोप है. सीबीआई ने यह मामला भ्रष्टाचार निवारण क़ानून के तहत दर्ज किया है.

पूर्व चेयरमैन के अलावा तत्कालीन कार्यकारी निदेशक एलपी नखवा, पूर्व अतिरिक्त महाप्रबंधक एकठपालिया, अमिताभ सिंह और रोहित भसीन पर भी मामला दर्ज किया है.

अमरीका-मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने को लेकर चल रहा गतिरोध बढ़ता जा रहा है.

अब अमरीकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर और डेमोक्रेटिक सांसद नैन्सी पेलोसी ने कहा कि जब तक आंशिक शटडाउन ख़त्म नहीं होता तब तक राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को उनका वार्षिक भाषण देने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

वहीं, डोनल्ड ट्रंप ने इस क़दम को देश के लिए अपमान और दुखद दिन बताया है. वह वैकल्पिक भाषण देने को लेकर बात कर रहे हैं. डोनल्ड ट्रंप ने इस संबंध में कहा, "हम सदन और सीनेट के सामने बहुत ही महत्वपूर्ण भाषण देने की योजना बना रहे थे."

"इसे स्टेट ऑफ़ यूनियन कहा जाता है, यह संविधान का हिस्सा है. हम ऐसा करने जा रहे थे लेकिन अब नैन्सी पेलोसी सच्चाई नहीं सुनना चाहतीं बल्कि वह अमरीकी लोगों को सच्चाई सुनने नहीं देना चाहतीं."

Wednesday, January 16, 2019

#10YearChallenge से बचना क्यों ज़रूरी है?

अगर आप फ़ेसबुक या टि्वटर पर मौजूद हैं, तो इस बात का अंदाज़ा होगा कि सोशल मीडिया में इन दिनों #10YearChallenge को लेकर दीवानगी किस हद तक है.

कोई बड़ी बात नहीं, अगर आप में से या आपके जानने वालों में से किसी ने इस 'चैलेंज' की धारा में बहकर अपनी मौजूदा और 10 या 20 साल पुरानी तस्वीर एकसाथ पोस्ट कर दी हो.

पहली नज़र में देखें तो ये नया ट्रेंड कोई ख़ास नुकसानदायक नहीं दिखता. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली या वायरल की जाने वाली हर चीज़ के पीछे कोई ना कोई ख़ास बात ज़रूर होती है.

क्या ये किसी बिज़नेस आइडिया का हिस्सा है? जानबूझकर जनता से उनकी नई और पुरानी तस्वीर पोस्ट करवाईं जा रही हैं, ताकि डाटा बैंक तैयार किया जा सके? क्या इसके पीछे कोई साज़िश है? क्या हमें इस तथाकथित चैलेंज से दूर रहना चाहिए?

इन सभी सवालों का जवाब तलाशने से पहले फ़ेसबुक का बयान जान लीजिए. सोशल मीडिया नेटवर्क का कहना है, ''ये यूज़र जनरेटेड मीम है, जो अपने आप वायरल हुआ है. फ़ेसबुक ने ये ट्रेंड शुरू नहीं किया है.'

''मीम वही फ़ोटो इस्तेमाल करता है, जो पहले से फ़ेसबुक में है. फ़ेसबुक को इससे कोई फ़ायदा नहीं है. और साथ ही ये भी याद रखना ज़रूरी है कि फ़ेसबुक यूज़र किसी भी वक़्त फ़ेशियल रिकग्निशन वाला फ़ीचर ऑन या ऑफ़ कर सकते हैं.''

बयान में फ़ेसबुक का रुख़ स्पष्ट है, लेकिन अगर हम ख़ास तौर से #10YearChallenge की बात ना भी करें तो भी हालिया अतीत में ऐसी कई सोशल गेम्स या मीम देखने को मिले हैं, जो सोशल इंजीनियरिंग का हिस्सा थे और जिनका मक़सद डाटा निकलवाना और एकत्र कर रखना था.

लेकिन जानकारों का मानना है कि ये चैलेंज टाइम पास करने और मज़े लेने की चीज़ नहीं है और इससे बचकर चलना ही बेहतर होगा.

जाने-माने साइबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल से जब पूछा गया कि क्या इस चैलेंज से कोई नुकसान भी हो सकती है, तो उन्होंने बीबीसी से कहा, ''जी बिलकुल, साइबर अपराधी इसका दुरुपयोग कर सकते हैं.''

लेकिन दस साल पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर डालने से क्या हो सकता है, इस पर उन्होंने कहा, ''देखिए, अभी तक इस तरह के दुरुपयोग का कोई सबूत सामने नहीं आया है. लेकिन एक बात ये समझ लीजिए कि जो तस्वीर अब तक उपलब्ध नहीं थी, अब लोग ख़ुद मुहैया करा रहा हैं.''

''और जब ये तस्वीर सोशल पर होंगी, तो इनकी मॉर्फ़िंग हो सकती है, टारगेट करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं.'' फ़ेशियल रिक्गिनशन एल्गोरिथम से ये मामला किस तरह से जुड़ा है, इस पर दुग्गल ने कहा, ''दुनिया भर में फ़ेशियल रिक्गिशन एल्गोरिथम पर काफ़ी काम चल रहा है. इससे ये आसानी से पता लग सकता है कि दस साल में शक्ल कितनी बदल रही है.''

''इन तस्वीरों की मदद से फ़ेशियल रिक्गिनशन पर काम करने वाली एजेंसियां अपने सॉफ़्टवेयर को ज़्यादा मज़बूत और ज़्यादा इंटेलीजेंट बना सकती हैं.''

लेकिन उस तस्वीरों को क्या, जो हमने दस साल पहले फ़ेसबुक पर पोस्ट की थीं. वो तो पहले से फ़ेसबुक पर उपलब्ध थीं, ऐसे में अब वो कैसे नुकसानदायक बन सकती है?

दुग्गल के मुताबिक, ''ये बात सही है कि वो तस्वीर पहले से फ़ेसबुक के पास थी, उसके एनवायरमेंट में थी, लेकिन वो कहीं और थी. इस चैलेंज में आप पुरानी तस्वीर को निकालकर अपनी नई तस्वीर के साथ तुलना करते हुए रख रहे हैं.''

''ऐसे में आप जब ये कदम उठा रहे हैं, तो एक नया डाटा सेट बना रहे हैं, जो पहले सोशल मीडिया वेबसाइट के पास नहीं था लेकिन अब आपने ये काम कर दिया है. एजेंसियों के लिए कम्पेरेटिव स्टडी का मामला है. और ये भी डर है कि साइबर अपराधी भी इनका गलत उपयोग कर सकते हैं.''

''इसलिए ये ज़रूरी है कि इस तरह के चैलेंज से बचा जाए क्योंकि आप सिर्फ़ अपनी तस्वीर पोस्ट नहीं कर रहे बल्कि पुरानी और संवेदनशील जानकारी कंपनियों को मुहैया करा रहे हैं, जिनका कितना दुरुपयोग हो सकता है, आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते.''

Tuesday, January 8, 2019

बीजेपी वर्कर की गोमाँस तस्करी के आरोप में गिरफ़्तारी’ का सच

दावा: गुजरात में भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता को गोमाँस की तस्करी के जुर्म में गिरफ़्तार कर लिया गया है और उसकी कार पुलिस ने ज़ब्त कर ली है.

इस दावे के साथ सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो को कई फ़ेसबुक पन्नों और ग्रुप्स में शेयर किया गया है.

फ़ेसबुक सर्च के अनुसार इस वीडियो को दस लाख से अधिक बार देखा जा चुका है.

वीडियो के शुरुआती हिस्से में एक फ़ोटो इस्तेमाल किया गया है जिसमें एक शख़्स सड़क पर बैठा हुआ दिखाई देता है और उसके इर्द-गिर्द माँस के कुछ टुकड़े बिखरे हुए हैं.

वीडियो के दूसरे हिस्से में दो अन्य तस्वीरें इस्तेमाल की गई हैं जिनमें अभियुक्त की गाड़ी और उसमें भरे माँस को दिखाने की कोशिश की गई है.

वीडियो में इस घटना को हाल ही का बताया गया है. लेकिन जब हमने इस वीडियो की पड़ताल की तो इन सभी दावों को फ़र्ज़ी पाया.

रिवर्स सर्च में हमने पाया कि इस वीडियो को सार्वजनिक तौर से फ़ेसबुक पर सबसे पहले 'साक्षी शर्मा' नाम की प्रोफ़ाइल ने पोस्ट किया था.

इस प्रोफ़ाइल पेज से बीते तीन महीने में क़रीब 50 हज़ार लोगों ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया है.

तस्वीरों की जाँच में हमने पाया कि सबसे पहली तस्वीर 28 जून 2017 की है.

ये वाक़या झारखंड के रांची शहर से सटे रामगढ़ का था, जहाँ मांस ले जा रहे अलीमुद्दीन नामक एक युवक की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.

अलीमुद्दीन की हत्या के बाद ग़ुस्साए लोगों ने उनकी गाड़ी में आग भी लगा दी थी. उनकी कार का नंबर WB 02K 1791 था.

अलीमुद्दीन की पत्नी ने बीबीसी को ये भी बताया था कि उनके पति पेशे से ड्राइवर थे और किसी राजनीतिक पार्टी से उनका कोई वास्ता नहीं था.

जब ये घटना हुई थी, उस समय बीबीसी को एक चश्मदीद ने बताया था कि भीड़ में शामिल लोग हल्ला कर रहे थे कि उनकी कार में गाय का मांस है. इसके बाद वहां लोगों की संख्या बढ़ती चली गई. सबने उनकी गाड़ी को घेर लिया और नीचे उतारकर मारने लगे. इस दौरान कुछ लोगों ने पेट्रोल छिड़क कर उनकी गाड़ी में आग लगा दी.

झारखंड की रामगढ़ कोर्ट ने कथित तौर पर गाय का मांस ले जा रहे एक युवक की पीट-पीटकर हत्या (मॉब लिंचिंग) के मामले में 11 कथित गौ-रक्षकों को हत्या का दोषी करार दिया है.

रामगढ़ ज़िले की पुलिस ने मॉब-लिंचिंग के इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के दो नेताओं को गिरफ़्तार भी किया था. अलीमुद्दीन की पत्नी ने इन्हें नामज़द अभियुक्त बनाया था.

वहीं इस मामले में 11 कथित गौ-रक्षकों को रामगढ़ कोर्ट ने हत्या का दोषी क़रार दिया था.

वीडियो के दूसरे हिस्से में गुजरात के अहमदाबाद की नंबर प्लेट वाली एक सफ़ेद कार का फ़ोटो इस्तेमाल किया गया है और तस्वीर पर भारतीय जनता पार्टी का चुनाव चिह्न 'कमल' बना हुआ है.

इसके साथ इस्तेमाल किए गए एक अन्य फ़ोटो में कुछ पुलिस वाले भी हैं जिन्होंने दो लोगों को गिरफ़्तार कर रखा है.

इन तस्वीरों के बारे में गुजरात पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी से हमने बात की.

उन्होंने कहा कि गोमांस की तस्करी के आरोप में बीते वर्षों में कोई बीजेपी कार्यकर्ता गिरफ़्तार नहीं किया गया है.

अहमदाबाद शहर के भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष जगदीश पंचाल ने बीबीसी से बातचीत में अपने किसी कार्यकर्ता के गिरफ़्तार होने की ख़बर को फ़र्ज़ी बताया.

उन्होंने कहा, "पिछले काफ़ी अरसे में बीजेपी के किसी भी सक्रिय कार्यकर्ता पर अहमदाबाद में गोमाँस की तस्करी का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है."